मेहुल चोकसी ने गिनाए भारत न आने के बहाने, कहा- हार्ट की सर्जरी हुई है
पीएनबी स्कैम का आरोपी मेहुल चोकसी भारत वापस ना आने के कई बहाने बना रहा है. अदालत को दी गई एक मेडिकल रिपोर्ट में उसने कहा है कि उसके दिमाग में खून का थक्का जमा हुआ है, उसे हाइपर टेंशन है, इसके अलावा उसे पैरों में भी दर्द है, साथ ही वह डायबिटीज का भी मरीज है. मेहुल चोकसी ने मुंबई की पीएमएलए कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि वह अपनी खराब सेहत की वजह से यात्रा कर पाने में असमर्थ है, लिहाजा उसे कोर्ट में पेश होने से छूट दी जाए.
पीएनबी घोटाले में मेहुल चोकसी पर देश का करोड़ों रुपया लेकर फरार होने का आरोप है. मेहुल चोकसी ने अदालत के सामने अपनी लंबी बीमारियों की फेहरिस्त सामने रखी है. इन बीमारियों में दिल की बीमारी, दिमाग की बीमारी, मोटापा, सांस लेने में परेशानी जैसी बीमारियां, आर्थराइटिस शामिल हैं.
रिपोर्ट की मानें तो उसके दाहिने पैर में लंबे समय से दर्द है. इसकी वजह से उसे चलने फिरने में परेशानी है. इसके लिए उसने रेडियोग्राफी रिपोर्ट अदालत में पेश की है. पीएनबी स्कैम में जांच का सामना कर रहे मेहुल चोकसी ने पेट का अल्ट्रासाउंड भी अदालत में पेश किया है.
मेहुल चोकसी ने डॉक्टरों के टेस्ट रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि डॉक्टरों ने खराब सेहत देखते हुए उसे कहा है कि वो एंटीगुआ में लगातार मेडिकल सुपरविजन में रहे और किसी तरह का सफर न करे. मेहुल चोकसी की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने उसकी हॉर्ट सर्जरी की है और उसे स्टेंट ( Stents) लगाया गया है. मेहुल चोकसी ने अपने एमआर एंजियोग्राम की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की है.
अदालत में पेश किए गए एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने मेहुल चोकसी की ब्रेन एमआरआई देखने के बाद कहा है कि उसे 3 से लेकर 4 महीने तक सफर करने से बचना चाहिए. रिपोर्ट के मुताबिक मेहुल चोकसी को मोटापे की बीमारी है और उसका मोटापा लेवल-थ्री स्तर तक पहुंच चुका है. इसके अलावे वह हाइपरटेंशन, दिल की बीमारी, डायबिटीज से भी जूझ रहा है.
इस वक्त एंटीगुआ में रह रहे मेहुल चोकसी ने डॉ एमए मार्कोस द्वारा की गई रिपोर्ट को कोर्ट में फाइल किया है. सैंट जॉन अस्पताल एंटीगुआ में प्रैक्टिस करने वाले इस डॉक्टर ने कहा है कि अगर मेहुल चोकसी ने सफर किया तो उनकी हालत और भी बिगड़ सकती है.
लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हो रही नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी का विषय ही ऐसा है कि हर कोई इस पर बात कर रहा है. फिल्म का ट्रेलर आ गया है. एक तबका कह रहा है कि फिल्म खासतौर से चुनाव में मोदी को फायदा पहुंचाने और प्रचार के लिए बनाई गई है.
लेकिन 5 अप्रैल को रिलीज हो रही फिल्म, अगर ट्रेलर का ही विस्तार होगी तो इस बात की आशंका प्रबल है कि फिल्म, मोदी का प्रचार करने से कहीं ज्यादा उनका मजाक उड़ाने में इस्तेमाल हो. ऐसा घटनाओं की अतिनाटकीय प्रस्तुति की वजह से हो सकता है. मोदी को निर्भीक, निडर राष्ट्रवादी और हीरो के रूप में दिखाने के लिए जिस तरह से घटनाओं का वर्णन किया गया है वह ट्रेलर में प्रभावी लगने की बजाय मजाकिया नजर आता है.
1992 में बीजेपी ने कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा एकता यात्रा निकालकर झंडा फहराया था. उस वक्त बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने यात्रा का नेतृत्व किया था. लेकिन "पीएम नरेंद्र मोदी" में इस घटना को बहुत ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है. यह कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोग लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. मोदी के ग्रुप को सेना के जवान कवर कर रहे हैं. बड़े पैमाने पर गोलियां चल रही हैं. निर्भीक मोदी हैं कि हाथ में तिरंगा लिए बढ़े ही जा रहे हैं.
ठीक इसी तरह आपातकाल की घटना का भी जिक्र ट्रेलर में नजर आता है. मोदी ने आपातकाल के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया था. लेकिन ट्रेलर में इंदिरा के सामने आपातकाल के दौरान मोदी को कुछ इस तरह से गढ़ा गया है कि वे आपातकाल में विपक्ष का नेतृत्व करने वाले बहुत बड़े नेता के तौर पर नजर आते हैं.
पीएनबी घोटाले में मेहुल चोकसी पर देश का करोड़ों रुपया लेकर फरार होने का आरोप है. मेहुल चोकसी ने अदालत के सामने अपनी लंबी बीमारियों की फेहरिस्त सामने रखी है. इन बीमारियों में दिल की बीमारी, दिमाग की बीमारी, मोटापा, सांस लेने में परेशानी जैसी बीमारियां, आर्थराइटिस शामिल हैं.
रिपोर्ट की मानें तो उसके दाहिने पैर में लंबे समय से दर्द है. इसकी वजह से उसे चलने फिरने में परेशानी है. इसके लिए उसने रेडियोग्राफी रिपोर्ट अदालत में पेश की है. पीएनबी स्कैम में जांच का सामना कर रहे मेहुल चोकसी ने पेट का अल्ट्रासाउंड भी अदालत में पेश किया है.
मेहुल चोकसी ने डॉक्टरों के टेस्ट रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि डॉक्टरों ने खराब सेहत देखते हुए उसे कहा है कि वो एंटीगुआ में लगातार मेडिकल सुपरविजन में रहे और किसी तरह का सफर न करे. मेहुल चोकसी की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने उसकी हॉर्ट सर्जरी की है और उसे स्टेंट ( Stents) लगाया गया है. मेहुल चोकसी ने अपने एमआर एंजियोग्राम की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की है.
अदालत में पेश किए गए एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने मेहुल चोकसी की ब्रेन एमआरआई देखने के बाद कहा है कि उसे 3 से लेकर 4 महीने तक सफर करने से बचना चाहिए. रिपोर्ट के मुताबिक मेहुल चोकसी को मोटापे की बीमारी है और उसका मोटापा लेवल-थ्री स्तर तक पहुंच चुका है. इसके अलावे वह हाइपरटेंशन, दिल की बीमारी, डायबिटीज से भी जूझ रहा है.
इस वक्त एंटीगुआ में रह रहे मेहुल चोकसी ने डॉ एमए मार्कोस द्वारा की गई रिपोर्ट को कोर्ट में फाइल किया है. सैंट जॉन अस्पताल एंटीगुआ में प्रैक्टिस करने वाले इस डॉक्टर ने कहा है कि अगर मेहुल चोकसी ने सफर किया तो उनकी हालत और भी बिगड़ सकती है.
लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हो रही नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी का विषय ही ऐसा है कि हर कोई इस पर बात कर रहा है. फिल्म का ट्रेलर आ गया है. एक तबका कह रहा है कि फिल्म खासतौर से चुनाव में मोदी को फायदा पहुंचाने और प्रचार के लिए बनाई गई है.
लेकिन 5 अप्रैल को रिलीज हो रही फिल्म, अगर ट्रेलर का ही विस्तार होगी तो इस बात की आशंका प्रबल है कि फिल्म, मोदी का प्रचार करने से कहीं ज्यादा उनका मजाक उड़ाने में इस्तेमाल हो. ऐसा घटनाओं की अतिनाटकीय प्रस्तुति की वजह से हो सकता है. मोदी को निर्भीक, निडर राष्ट्रवादी और हीरो के रूप में दिखाने के लिए जिस तरह से घटनाओं का वर्णन किया गया है वह ट्रेलर में प्रभावी लगने की बजाय मजाकिया नजर आता है.
1992 में बीजेपी ने कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा एकता यात्रा निकालकर झंडा फहराया था. उस वक्त बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने यात्रा का नेतृत्व किया था. लेकिन "पीएम नरेंद्र मोदी" में इस घटना को बहुत ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है. यह कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोग लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. मोदी के ग्रुप को सेना के जवान कवर कर रहे हैं. बड़े पैमाने पर गोलियां चल रही हैं. निर्भीक मोदी हैं कि हाथ में तिरंगा लिए बढ़े ही जा रहे हैं.
ठीक इसी तरह आपातकाल की घटना का भी जिक्र ट्रेलर में नजर आता है. मोदी ने आपातकाल के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया था. लेकिन ट्रेलर में इंदिरा के सामने आपातकाल के दौरान मोदी को कुछ इस तरह से गढ़ा गया है कि वे आपातकाल में विपक्ष का नेतृत्व करने वाले बहुत बड़े नेता के तौर पर नजर आते हैं.
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